ये वो हैं जो गुमराह हैं 

 

अक्सर देखता रहता हूँ मैं अपने दोस्तों को

चट्टान की तरह टीके है वो अपने विचारों पे

मित्र जो मेरा मार्क्सिस्ट है तो है वो मार्क्सिस्ट और

राइटिस्ट दोस्त हमेशा अपने ख्यालों में राईट रहता है।।

मोदी को जो चाहतें है वो बस उसे चाहतें है

जो नफरत करते हैं तो बस नफरत करते हैं

ऐसे हीं सच्चे हमारे कांग्रेस वालें भी हैं

गांधी और नेहरू से प्यार करने वाले भी हैं।।

जातिवाद का विरोध करने वालों की भी अपनी जाती है

ब्राह्मणवाद का विरोध करने वालें बुद्ध भी देखो संघी हैं

मैं हीं हूँ जो भटक जाता हूँ क़ुरआन से फिर गीता में

बाइबिल पढ़ा अगर कल तो आज हाथ में नया ग्रंथ है।।

एक राह पकड़ कर चल दिया है आपने देखता हूँ मैं तो

मंज़िल की बातें करते रहते हो आप सुनता रहता हूँ मैं तो

ख़ुदा आपको जन्नत देगी जैसी दृढ़ चाल है आपकी

मैं तो आज काफ़िर हूँ तो कल पांच वक़्त का नमाज़ी।।

पर कैसे मेरे दोस्त तुम इतने अटल रहते हो

हरेक बात पे अपने दल के साथ रहते हो

जड़ो के इतने मजबूत बड़े वृक्ष बन गए हो आप

टहनियों को फिर भी भटकने से रोक नहीं रहे हो आप।।

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One thought on “ये वो हैं जो गुमराह हैं 

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