FB Poems

नही करना है अगर समझौता तुमको
लड़ना है आगे जाना है तुमको
बात याद रख गाँठ बाँध तुम
जान कुछ याद रखना नहीं तुम
भूलना बस बात याद रखना तुम

ये जो बुनियादी बातों का सुरूर है
आप कहते हैं कि ये मेरा गुरुड़ है

चलो मैं भी खड़ा हो जाता हूँ हवा में
जाता हूँ अब मैं भी तुम्हारी जहाँ में

पर ये जमीन जो कमबख्त मुझे खीचती है
कहीं यही तो नही जो कहते हैं गुरुत्वाकर्षण है

खून अभी भी उबल रहा है
भले हीं बदन से नहीं छलक रहा है।

और कुछ नहीं होगा मुझे इसकी गर्मी से
जैसे तू भी तो नहीं मरता अपनी बेशर्मी से ।।

तेरी जुबाँ पे ताले जिन काफिरों ने लगा डाले हैं,
उनके बुतों को तोड़ने की अब कूवत नहीं तेरे बाजूओं में।

इन तालों के अंदर तेरे मंतर घुट के रह जाएंगे,
और माला फेरते फेरते तेरे दोनों हाँथ दुःख जाएंगे।।

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