ये इतना अँधेरा क्यों है !!!

लिख देते

वो सारे बयान जो आप देना चाहते थे,
सवालों के जवाब जो आप देना चाहते थे।
आपके लफ्जों में कहीं दिखा नहीं किसी को,
वो तो जब आप रोयें तो आँसु छलके उनके।।


लाजवाब मैं खुद से हो गया

जो मैं गया दिल दुखाने तेरा तो दर्द मुझको हो गया
आपकी आँखों का अनदेखा देखकर
चेहरा मैं अपना भूल गया
आया था आपकी बेवफाई की शिकायत करने मैं आपसे
जो हाल बताया आपने इश्क़ के आज का तो लाजवाब मैं खुद से हो गया ।।


प्यार की कविता

फिर किसी ने कहा तुम प्यार पे लिखो
उस हसीना पे जिनपे तुने ऐतबार किया था उनपे लिखो।
मैं थोडा मुस्कराया क्योंकि मैं समझ गया
साथ वो भले हीं मेरे थी पर मोहब्बत तो उन्हें ज़माने से हीं था ।।


अब अच्छी हो

मुझसे दूर हीं सही पर अब तुम अच्छी हो
कुछ नहीं तो कम से कम तुम अब सच्ची हो।।

चलो अब यह डर तो नहीं कि तुम रो दोगी ।
शायद अब ऐसे खयालो पे हीं तुम हंस दोगी ।।


भुला  दूंगा

जो बाकी है थोडा दर्द अंदर अभी भी
कसम खुदा कि मिटा दूंगा मैं उसे भी।

आये जो कोई आवाज़ अब मेरे दिल से
कहता हूँ सिर्फ अपनी हंसी से दबा दूंगा

तूने तो इतनी जल्दी की मुझे भुला  देने में
मैं भी देर हीं सही लेकिन तुझे भुला  दूंगा ।।


तेरे आंसू

मेरे आँखों से आंसू निकलता हीं नहीं
कुछ भी हो बात ये दिल रोता हीं नहीं
ऐसा भी नहीं की नहीं दर्द इसके अन्दर
पर ये समंदर बाहर निकलता हीं नहीं


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