भला चाहने वाले बुद्धिजीवी

अपने इस विजय भाषण के एकदम शुरुआत में ही (start @ 3) मोदी जी देश का भला चाहने वाले बुद्दिजीवियों से बोलते हैं कि वो जिस तरह से बार बार देश के सामान्य मानवियों का (गलत) आकलन कर रहें हैं, वैसा करने वालो का कोई भला नही होता है, देश का जो नुकसान होता है … More भला चाहने वाले बुद्धिजीवी

पद्मिनी, मध्यकाल और इतिहास

कितना बढियां लग रहा है देख के। पद्मावती नाच रहीं है। और वो भी पचास साठ सह नर्तकियों के साथ। और इतने अच्छे से नाच रही हैं। मैंने थोड़ा गूगल में ढूंढने की कोशिश की कि अगर पद्मिनी के नृत्यकला में पारंगता के बारे में कहीं कोई चर्चा है। ऐसा तो कुछ मिला नहीं कि … More पद्मिनी, मध्यकाल और इतिहास

रूम

सुबह के नौ बजे होंगे। छुट्टी का दिन था। फ़ोन की घंटी बजी। अंजान नंबर था। उठाया तो देखा उस तरफ कोई  सौहाद्र था। कोई खास जानता नहीं था उसे, मुझे तो याद भी नहीं था, उसी ने याद दिलाया कि दो साल पहले मैंने इतिहास का एक कोर्स पढ़ाया था उसके क्लास में। तब … More रूम

Truth and Reality

Is there a difference between truth and realty. Let me explain.  One of the major thrust of Abrahmnic religion (by Abrahmnic religion I mean those religion who do not believe in the existence of Brahma, Brahmins) is that they believe in  a true God. They believe that in truth, God, The Omnipotent, has to be … More Truth and Reality

पटाखों पे मेरे बयान 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत है। पटाखों के प्रति मेरा जो प्रेम है, वो मुझे जानने वाले वाले सभी लोग जानते हैं। दीवाली मेरे बचपन का फेवरेट फेस्टिवल रहा है और कोई दिया विया और उसकी सुंदरता आदि से कभी कोई मतलब नहीं था मेरा और ना हीं मुझे कभी इस बात की कोई ऐसी ख़ुशी थी कि आज राम … More पटाखों पे मेरे बयान 

Common Sense

तुरंत अभी रवीश बाबू का प्रोग्राम देखा, जिसमे उन्होंने हमलोगों को खूब लताड़ा है इस बात पे कि आखिर हम रोहिंग्या मुसलमानो की तरफ क्यों नहीं देख रहें हैं। उनका कहना था, अगर वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयोर्क टाइम्स उन पर इतना लिख बोल सकते हैं तो हम क्यों नहीं !! सच बात है, वो नहीं … More Common Sense